127
अगर ख़ुदावन्द ही घर न बनाए,
तो बनाने वालों की मेहनत' बेकार है।
अगर ख़ुदावन्द ही शहर की हिफ़ाज़त न करे,
तो निगहबान का जागना 'बेकार है।
तुम्हारे लिए सवेरे उठना और देर में आराम करना,
और मशक़्क़त की रोटी खाना 'बेकार है;
क्यूँकि वह अपने महबूब को तो नींद ही में दे देता है।
देखो, औलाद ख़ुदावन्द की तरफ़ से मीरास है,
और पेट का फल उसी की तरफ़ से अज्र है,
जवानी के फ़र्ज़न्द ऐसे हैं,
जैसे ज़बरदस्त के हाथ में तीर।
ख़ुश नसीब है वह आदमी जिसका तरकश उनसे भरा है।
जब वह अपने दुश्मनों से फाटक पर बातें करेंगे तो शर्मिन्दा न होंगे।